बृहदेश्वर मंदिर की पुरी जानकारी | Brihadeshwara Temple in Hindi.

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित बृहदेश्वर मंदिर से जुड़ी जानकारी के बारे में जाने वाले हैं। इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर बिना नीव का ही खड़ा है। इस मंदिर के बारे में ही बताया जाता है कि इस मंदिर के ऊपर बने गुटबंद का छाया धरती पर उस समय भी कभी नहीं पड़ता जब सूरज अपने चरम पर होता है। ऐसे ही कई और भी महत्वपूर्ण जानकारी इस आर्टिकल में हम बृहदेश्वर मंदिर से जुड़ी जानने वाले हैं। आप भी अगर इस बृजेश्वरी मंदिर से जुड़ी जानकारी को पूरी अच्छी तरह से जानना चाहते हैं, तो आप हमारे इस आर्टिकल को पूरा अंत तक जरूर पढ़ें। चलिए हम अपने इस आर्टिकल में आगे जानकारी की ओर बढ़ते हैं –

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बृहदेश्वर मंदिर के बारे में – About Brihadeshwara Temple in Hindi.

बृहदेश्वर मंदिर भारत के दक्षिणतम राज तमिलनाडु में स्थित एक प्राचीन और आश्चर्यचकित कर देने वाली हिंदू मंदिर हैं। इस मंदिर को इस तरह से बनाया गया है कि यह बिना नीव का ही खड़ा है। इस मंदिर का निर्माण के लिए तकरीबन 130000 टन से भी अधिक ग्रेनाइट का यूज़ किया गया था।

यहां पर एक बहुत बड़ी नंदी की प्रतिमा भी बनी हुई है। इसके अलावा यह वही मंदिर है जिसकी ऊपरी भाग पर बने गुटबंद की छाया जब सूरज अपने चरम पर होता है तब भी कभी धरती पर नहीं पड़ती है। इस बृजेश्वरी मंदिर से जुड़ी पूरी जानकारी हमने अपने इस आर्टिकल में आगे स्टेप बाय स्टेप विस्तार से दी है कृपया आप हमारे इस आर्टिकल में अंत तक बने रहिए। चलिए हम अपने इस आर्टिकल में जानकारी की ओर आगे बढ़ते हैं –

बृहदेश्वर मंदिर का इतिहास – History of Brihadeshwara Temple in Hindi.

बृहदेश्वर मंदिर भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में स्थित एक पौराणिक एवं प्राचीन मंदिर हैं। यह बृहदेश्वर मंदिर तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित हिंदू धर्म से जुड़ी एक हिंदू धर्म का प्रमुख धार्मिक स्थल है।

यह बृहदेश्वर मंदिर मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। इस बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण चोल वंश के द्वारा करवाया गया था। चोल वंश के द्वारा इस विदेश्वर मंदिर का निर्माण 1010 ईस्वी के दौरान करवाया गया था। इस मंदिर में भगवान शिव की नृत्य की मुद्रा में स्थित मूर्ति है जिसे नटराज के नाम से जाना जाता है। इस बृहदेश्वर मंदिर को राजेश्वर मंदिर राजराजेश्वर और पेरिया कोविल के नाम से भी जाना जाता है।

यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों की वजह से काफी प्रमुख एवं प्रसिद्ध हैं जिसकी वजह से इसे यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया है। इस मंदिर के निर्माण के लिए तकरीबन 130000 टन से भी अधिक ग्रेनाइट का उपयोग करते हुए इसे बनाया गया है।

इस बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण चोल वंश के शासक महाराजा राजाराज प्रथम के द्वारा 1000 से 1009 ईस्वी के दौरान करवाया गया था। इस मंदिर का निर्माण करने में तकरीबन 5 साल का समय लगा था, इन्हीं के नाम पर इस मंदिर का नाम राजराजेश्वर मंदिर रखा गया था।

इस बृहदेश्वर मंदिर में नंदी बैल की बहुत बड़ी प्रतिमा को भी बनाया गया है जिसका वजन तकरीबन 20 टन बताया जाता है। आपको बता दें महाराज राजराज प्रथम भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे वह इस बृहदेश्वर मंदिर के अलावा भी कई शिव मंदिरों का निर्माण करवाया है।

बृहदेश्वर मंदिर की वास्तुकला – Architecture of Brihadeshwara Temple in Hindi.

बृहदेश्वर मंदिर भारत के तमिलनाडु राज्य में तंजावुर में स्थित एक भारत की प्रमुख मंदिर हैं। इस मंदिर की वास्तुकला काफी खूबसूरत एवं आश्चर्यचकित कर देने वाली है। इस मंदिर को बनाने के लिए तकरीबन 130000 टन से भी अधिक ग्रेनाइट का उपयोग करते हुए इस मंदिर का निर्माण किया गया है, लेकिन इस मंदिर को बनाने के लिए ग्रेनाइट कहां से आया इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।

इस मंदिर का प्रमुख आकर्षण 216 फीट लंबा टावर हैं जो कि इस मंदिर के गर्भ गृह के ऊपर देखा जा सकता है। जब पर्यटक यहां पर आते हैं तो यह टावर काफी दूर से ही दिख जाता है। इसके अलावा यहां पर एक और प्रमुख चीज है वह है नंदी बैल की प्रतिमा जिसकी ऊंचाई तकरीबन 2 मीटर लंबी और 6 मीटर के साथ चौड़ाई में ढाई मीटर हैं यह प्रतिमा तकरीबन 20 टन वजन का है।

इसके अलावा इस मंदिर की सबसे आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि इस मंदिर की गुटबंद की छाया जब सूरज अपने चरम पर होता है तो तब भी कभी भी जमीन पर नहीं पड़ती है। इस रहस्य को जानने के लिए दुनिया भर से कई वास्तुकार और शिल्पकार भी आए। यह मंदिर वर्तमान समय में यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में शामिल हैं।

इस मंदिर से जुड़ी एक और बात बताई जाती है इस मंदिर के ऊपरी गुटबंद को तकरीबन 80 टन वजन के एक पत्थर से बनाया गया है। इस मंदिर से जुड़ी एक और आश्चर्यचकित करने वाली बात बताई जाती है कि यह बृहदेश्वर मंदिर बीना नीव का ही खड़ा है। यह कैसे संभव है इसके बारे में कोई कुछ नहीं बताता है।

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बृहदेश्वर मंदिर का रहस्य –

तमिलनाडु राज्य में स्थित इस बृहदेश्वर मंदिर से जुड़ी कई आश्चर्यचकित कर देने वाले रहस्य हैं, यह जानने और देखने के लिए लोग भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के अलावा विदेशों से भी काफी अधिक संख्या में आया करते हैं। चलिए हम मंदिर से जुड़ी रहस्यों को एक एक कर विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं –

बृहदेश्वर मंदिर के ऊपरी हिस्से पर बनी गुटबंद की छाया धरती पर नहीं पड़ती

बृहदेश्वर मंदिर पर इस तरह से बनाया गया है कि इस मंदिर के ऊपरी सिरे पर बना हुआ गुटबंद जिसकी छाया पृथ्वी पर नहीं पड़ती भले ही सूर्य का प्रकाश किसी भी दिशाओं से इस पर पड़े। दोपहर के समय में भी इस मंदिर के नीचे के कुछ हिस्से की परछाइयां जमीन पर दिखती है लेकिन इस मंदिर के ऊपरी हिस्से पर बने गुटबंद की परछाइयां कभी भी धरती पर नहीं बनती। इस घटना से जुड़ा रहस्य आज भी बना हुआ है। इस मंदिर के ऊपरी हिस्से पर 80 टन का ग्रेनाइट का बना हुआ गुटबंद जिसके ऊपर एक स्वर्ण कलश को भी स्थापित किया गया है।

बृहदेश्वर मंदिर बिना नीव के कैसे टिका हुआ है ?

इस बृजेश्वरी मंदिर के सबसे आश्चर्यजनक करने वाली खास बात यह है कि इस मंदिर को बनाने के लिए नीव को नहीं बनाया गया है। सबको आश्चर्यचकित करती है कि आखिर बिना नीव के यह 130000 टन ग्रेनाइट से बना मंदिर अखिर खाड़ी कैसे हैं।

मंदिर के ऊपरी हिस्से पर बाड़ा गुटबंद

इस बृहदेश्वर मंदिर के ऊपरी हिस्से केवल एक ही काफी बड़ा लगभग 80 टन वजन का एक विशालकाय पत्थर से बना है। इसके बारे में आश्चर्य बता यह है कि जिस समय इस मंदिर का निर्माण हुआ था उस समय तो ना ही क्रेन जैसे कोई मशीन थी और नहीं और कुछ तो इतना बड़ा पत्थर को इस मंदिर के ऊपरी हिस्से पर रखा कैसे गया होगा।

बृहदेश्वर मंदिर का अद्भुत चित्रकारी और रंग

इस बृहदेश्वर मंदिर के दीवारों पर विभिन्न प्रकार के देवी-देवताओं की छोटी-छोटी मूर्तियों को नकाशा गया है इसके अलावा इस मंदिर का शिखर ऐसा लगता है कि उससे किसी रंग से पोता गया है लेकिन वह किसी प्रकार का रंगा नहीं गया है वह एक पत्थर का वास्तविक रंग है। यह भी अपने आप में एक अनूठे चमत्कार से कम नहीं है।

मंदिर की सबसे आश्चर्यजनक वाली सिस्टम –

इस बृहदेश्वर मंदिर को ग्रेनाइट के शिलाखंड द्वारा बनाया गया है लेकिन इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस शिलाखंड को आपस में जोड़ने के लिए किसी भी गूंध या चुना या सीमेंट से नहीं चिपकाया गया है बल्कि इन पत्थरों को आपस में इस तरह से फिक्स किया गया है कि यह मंदिर देखने से लगता है कि इसे किसी केमिकल से चिपकाया गया होगा।

वृद्धेश्वर मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य – Brihadeshwara Temple Facts

  • बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण तकरीबन 130000 ग्रेनाइट से किया गया है।
  • इस बृहदेश्वर मंदिर को बनाने के लिए ग्रेनाइट कहां से लाया गया है इसके बारे में आज तक कोई जानकारी नहीं है।
  • इस बृहदेश्वर मंदिर को चोल वंश के शासकों द्वारा बनवाया गया था।
  • चोल वंश के शासकों द्वारा इस बृहदेश्वर मंदिर की तरह कई अन्य मंदिरों का निर्माण करवाया गया था।
  • इस ब्रजेश्वरी मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में भी शामिल किया गया है।
  • इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर की गुंबद की छाया धरती पर नहीं पड़ती हैं।
  • इस मंदिर के ऊपरी हिस्से के गोपुर के शीर्ष पर करीब 80 टन वजन का एक पत्थर रखा गया है जिसे कैप स्टोन कहा जाता है।
  • इस बृजेश्वरी मंदिर के परिसर में नंदी बैल की एक विशालकाय प्रतिमा को भी स्थापित किया गया है, जो देखने में काफी ज्यादा अद्भुत और आकर्षक लगता है।

बृहदेश्वर मंदिर का खुलने एवं बंद होने का समय – Opening and Closeing Time of Brihadeshwara Temple in Hindi.

विदेश्वर मंदिर के खुलने एवं बंद होने का समय भी निर्धारित किया गया है इसलिए आपको यहां पर जाने से पहले उसे खुलने और बंद होने का समय के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर ले लेनी। चाहिए इस बृहदेश्वर मंदिर का खुलने एवं बंद होने का समय के बारे में बात करें तो पूरे सप्ताह में सुबह 6:00 बजे खुलता एवं दोपहर 12:30 बजे बंद हो जाता है फिर पुनः शाम 4:00 बजे खुलता एवं रात 8:30 बजे बंद हो जाता है। इस बृहदेश्वर मंदिर में बताए गए इन्हीं समयो के बीच सभी गतिविधियां की जाती हैं। इस बताए गए समय में थोड़ा बहुत बदलाव साल के अलग-अलग सीजन के अनुसार देखा जा सकता है।

बृहदेश्वर मंदिर का प्रवेश शुल्क – Entry Fee of Brihadeshwara Temple in Hindi.

बृहदेश्वर मंदिर हिंदू धर्म से जुड़ी एक पौराणिक धार्मिक स्थल हैं। यह मंदिर मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित हैं। यहां पर किसी भी व्यक्ति को जाने के लिए कोई भी प्रवेश शुल्क देने की जरूरत नहीं होती है आप यहां पर निशुल्क ही जा सकते हैं।

बृहदेश्वर मंदिर जाने का अच्छा समय – Best Time to Visit Brihadeshwara Temple in Hindi.

वृद्धेश्वर मंदिर विजिट करने के बारे में बात पहले तो आप यहां पर वैसे तो पूरे साल में आपको जब भी टाइम मिले तब भी आप इस बृहदेश्वर मंदिर को विजिट कर सकते हैं। लेकिन यहां पर गर्मी के मौसम के दौरान काफी तेज चिलचिलाती धूप रहती हैं जिसकी वजह से यहां पर आने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड सकता है।

वही वर्षा ऋतु के दौरान हल्की फुल्की बारिश के कारण भी दिक्कतें हो सकती हैं यही वजह है कि यहां पर अधिकतर लोग सर्दी के मौसम के दौरान आना पसंद करते हैं और यही समय भी यहां पर आने का अनुकूल समय भी माना जाता है। वैसे आप यहां पर आयोजित होने वाले समारोह के दौरान भी आ सकते हैं। यह समय भी यहां पर आने का एक अच्छा समय माना जाता है।

बृहदेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे – How to Reach Brihadeshwara Temple in Hindi.

बृहदेश्वर मंदिर पहुंचने के बारे में बात करें तो यहां पर कोई भी व्यक्ति किसी भी माध्यम जैसे – वायु मार्ग, रेल मार्ग या सड़क मार्ग के सहायता से वृद्धेश्वर मंदिर काफी सरलता पूर्वक पहुंच सकता है क्योंकि बृहदेश्वर मंदिर के नजदीक में ही एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन स्थित है जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति यहां पर आसानी से पहुंच सकता है। वृद्धेश्वर मंदिर के नजदीक की एयरपोर्ट की बात करें, तो वह तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है।

अगर कोई व्यक्ति बृहदेश्वर मंदिर रेलवे मार्ग से जाना चाहता है तो उसके लिए बता दें कि बृहदेश्वर मंदिर के नजदीकी रेलवे स्टेशन तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन है।आप तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन के लिए रामेश्वरम, कन्याकुमारी, मदुरई जैसे प्रमुख शहरों से आसानी से ट्रेन की सुविधा मिल जाती है जिसकी मदद से आप तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन पहुंच सकते हैं। तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचने के उपरांत यहां पर चलने वाले स्थानीय परिवहन के मदद से बृजेश्वरी मंदिर को आसानी से कर सकते हैं।

अगर कोई व्यक्ति विदेश्वर मंदिर सड़क मार्ग की सहायता से अपने यहां से पहुंचना चाहता है तो भी वह व्यक्ति काफी सरलता पूर्वक बृहदेश्वर मंदिर सड़क मार्ग से पहुंच सकता है क्योंकि बृहदेश्वर मंदिर सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यहां के लिए बेंगलुरु, चेन्नई, मदुरई, भुनेश्वर, तिरुचिरापल्ली जैसे प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा काफी आसानी से पहुंचा जा सकता है।

नमस्कार साथियों, आज का हमारा यह आर्टिकल जो कि तमिलनाडु राज्य में स्थित बृहदेश्वर मंदिर के बारे में था यहीं पर समाप्त होता है। इस आर्टिकल से जुड़ी अगर आप हमें कोई अपडेट या सुझाव देना चाहते हैं, तो आप हमें बेशक नीचे कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं ताकि हम उसे अपडेट करते समय अपने आर्टिकल में सम्मिलित कर सकते हैं। एक बात और अगर हमारी यह आर्टिकल आपको पसंद आई हो तो आप इसे अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों के साथ शेयर जरूर करें ताकि उन्हें भी इस बृहदेश्वर मंदिर के बारे में सारी जानकारी प्राप्त हो सके।

धन्यवाद

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