शराब पीने वाली माता | भंवाल देवी मंदिर राजस्थान | bhanwala Devi Temple Rajasthan In Hindi

आज मैं आपको शराब पीने वाली माता यानी भंवाल देवी के बारे में बताने वाला हूं। दोस्तों आपने सभी जगह हिंदू धर्म की देवियों को प्रसाद चढ़ाई होगी, लेकिन आज मैं आपको राजस्थान के नागौर जिले में स्थित भांवलगढ़ गांव में स्थित हिंदू धर्म की देवी भंवाल देवी के बारे में बताने वाला हूं, जिन्हें मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए शराब में से ढाई प्याले शराब को पी जाती हैं।

शराब पीने वाली माता (भंवाल देवी) से जुड़ी प्रचलित कथा एवं इतिहास – History of bhanwala Devi Temple Rajasthan In Hindi

प्राचीन कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि भंवाल माता भांवलगढ़ गांव में एक खेजड़ी के वृक्ष के नीचे धरती से स्वयं उत्पन्न हुईं थी। इस मंदिर से डाकुओं की एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि डाकुओं का एक दल इस मंदिर के पास में ही निवास करता था। एक बार राजा की सेना ने जब डाकुओं की फौज को चारों तरफ से घेर लिया था, तो डाकुओं ने अपने प्राण की रक्षा करने के लिए माता भंवाल देवी को याद किया, क्योंकि उनके पास बचने का और कोई चारा नहीं था।

डाकुओं की प्रार्थना सुनने के बाद माता ने उन डाकुओं की पूरी फौज को भेड़ बकरी में तब्दील कर दिया। राजा की सेना ने डाकुओं की सेना की जगह भेड़ बकरी को देख कर वहां से चले गए। सेना के चले जाने के बाद सभी डाकू मनुष्य रूप में आ गए। इस घटना को डाकुओं ने माता भंवाल देवी का आशीर्वाद समझा और माता को प्रसाद चढ़ाने की सोंची, लेकिन उनके पास एक शराब के बोतल के अलावा कुछ भी नहीं था।

डाकुओं की एक सेना ने कहा की मां तो अपने भक्तों द्वारा दिए गए किसी भी चीज से खुश हो जाती हैं, इसलिए उन्होंने माता को शराब पिलाने के लिए एक प्याले में शराब निकाली और माता भंवाल देवी के मुख के पास ले गए। माता ने देखते ही देखते शराब की प्याला खाली कर दिया। डाकू भी इस घटना से आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने फिर उसी प्याले में माता को शराब दी और दूसरे प्याले का शराब भी खत्म हो गया। तीसरे शराब की प्याले में से माता ने आधी प्याले शराब पीने के बाद आधी भैरव बाबा को छोड़ दिया। इस तरह से माता भंवाल देवी शराब पीने वाली माता के रूप में प्रसिद्ध हो गईं।

आज के समय में माता भंवाल देवी के जिस भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है, वह माता के लिए प्रसाद के रूप में शराब ही लेकर जाता है। अगर किसी भक्त की मनोकामना पूरी नहीं हुई होती है या मनोकामना पूर्ण होने से पहले ही कोई भक्त माता के लिए शराब लेकर जाता है, तो माता उनके द्वारा गए शराब को नहीं पीती हैं।

अगर कोई भक्त चमड़े का जूता, बेल्ट या वॉलेट वगैरह लेकर माता के लिए शराब लेकर जाता है, तो भंवाल माता उनके द्वारा लाए गए शराब को भी नहीं पीती हैं।

इस मंदिर में माता भंवाल देवी के साथ माता ब्राह्मणी की मूर्ति भी स्थापित है। बाईं ओर स्थापित माता भंवाल देवी ढाई प्याले मदिरा पान का सेवन करती हैं, तो दाईं ओर स्थापित ब्राह्मणी माता को फल और मिठाई आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

भंवाल देवी मंदिर में कब जाना चाहिए ? – Best Time To Visit bhanwala Devi Temple Rajasthan In Hindi

आप इस मंदिर में साल में कभी भी जा सकते हैं, लेकिन इस मंदिर में साल के दोनों नवरात्रि के समय भारी मेले का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ कर आती है। नवरात्रि के समय ज्यादा भीड़ होने की वजह से माता भंवाल देवी को सभी भक्तों द्वारा लाए गए शराब में से थोड़ा-सा शराब पिलाया जाता है।

माता भंवाल देवी मंदिर कैसे पहुंचे ? – How to Reach bhanwala Devi Temple Rajasthan In Hindi

नजदीकी हवाई अड्डा कृष्णगढ़ है, जो मंदिर से करीब 103 किमी. की दूरी पर स्थित है। कृष्णगढ़ एयरपोर्ट से मंदिर तक पहुंचने के लिए किराए के वाहन की सुविधा उपलब्ध होती है।

नजदीकी रेलवे स्टेशन मेड़ता सिटी है, जो यहां से करीब 24 किमी. की दूरी पर स्थित है और रेलवे स्टेशन से मंदिर तक आने के लिए भी वाहनों की सुविधा उपलब्ध होती है।

नजदीकी बस स्टैंड है, जो मेड़ता-जसनगर सड़क मार्ग से चलती है। मेड़ता बस स्टैंड से मंदिर के बगल वाले सड़क मार्ग पर बस और टैक्सियां चलती रहती है।

अगर आपको इस मंदिर से जुड़ा इतिहास और प्रचलित, कथा एवं अन्य जानकारी अच्छी लगी हो, तो आप इस जानकारी को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों के साथ शेयर जरूर करें।

धन्यवाद !

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